फिल्म महोत्सव में जिव्तिया डॉक्यूमेंट्री का हुआ प्रदर्शन, दर्शकों ने खूब सराहा

आज दिनांक 13 दिसंबर 2016 को फिल्म महोत्सव के पांचवें दिन जिउतिया द सोल ऑफ़ कल्चरल सिटी दाउदनगर डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म रविन्द्र भवन में दिखायी गयी।9-16 दिसंबर तक बिहार राज्य फ़िल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से पटना के रविन्द्र भवन में पटना फ़िल्म महोत्सव का आयोजन किया गया है। इस उत्सव के लिए कई सारे फिल्मकारों ने आवेदन किया था जिसमे सिर्फ 38 फिल्मों को प्रदर्शित करने के लिए चुना गया था। उनमें से एक दाउदनगर में निर्देशक धर्मवीर भारती द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी शामिल है।

फ़िल्म के एसोसिएट डायरेक्टर डॉली ने बताया की जिउतिया डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म में दाउदनगर की लोक कला और संस्कृति को बारीक़ी से फ़िल्माया गया है। जिउतिया लोक संस्कृति में अनेकों चरित्रों के स्वांग रचे जाते है। यहाँ के स्वांग कला को विद्वानों ने दो भागों, पारंपरिक स्वांग और आधुनिक स्वांग के रूप में विभक्त किया है।

जिउतिया डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म को देखने रफीगंज क्षेत्र के विधायक अशोक कुमार सिंह धर्मपत्नी निशा सिंह के साथ पहुंचे।

अशोक कुमार सिंह ने कहा की आज मैंने दाउदनगर की लोककला को गहराई से जाना है, और इस कला को संरक्षण और विस्तार के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार ज़रूरी है। वहीँ निशा सिंह ने कहा की हमारी संस्कृति समृद्ध है लेकिन उपेक्षित है, लेकिन डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म के कारण जिउतिया संस्कृति को बड़े पैमाने पर पहचान मिली है।

औरंगाबाद के मदनपुर से फ़ेस्टिवल में फ़िल्म देखने आये आशुतोष सिन्हा ने कहा की अपने क्षेत्र की संस्कृति पर बनी फ़िल्म का पटना फ़िल्म फ़ेस्टिवल में चयन होना गर्व की बात है। मदनपुर से अरुणोदय दाउदनगर से पप्पू कुमार, संकेत सिंह, संजय तेजस्वी के साथ कई लोग अपने क्षेत्र पर बनी फ़िल्म को देखा।जिउतिया लोक कला में फ़िल्म डायरेक्टर धर्मवीर भारती के शोध के साथ-साथ श्रवण संस्कृति के वाहक दाउदनगर के लेखक उपेन्द्र कश्यप के शोध भी इस फ़िल्म महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

फ़िल्म समीक्षकों ने डॉक्यूमेंट्री में फिल्माए गए सीन के लिए कैमरा मैन रणवीर कुमार के कार्य को सराहा।

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