जनता की आवाज : बढ़ती आबादी को देखते हुए जल निकासी पर भी दे ध्यान

 सतीश पाठक - कंप्यूटर शिक्षक

सतीश पाठक – कंप्यूटर शिक्षक

ऐतिहासिक शहर दाउदनगर जो अपने आप में बहुत कुछ देखा। मुगल काल से लेकर आज तक यहां बहुत कुछ बदला है, और अाने वाले कल में भी बदलता रहेगा। इस शहर को विरासत में बहुत कुछ मिला है। परंतु दुर्भाग्य कहे या समय, इसे हम बचा न सके। जो हमारे लिए नासूर बनता जा रहा है। ऐसे ही समस्या जल निकासी की शहर के लिए बन गयी है। इस वर्ष की बारिश ने हमें सचेत किया है कि अगर इस समस्या पर हम गंभीर नहीं हुए तो और भी भ्यावह हो सकती है।

अपने शहर में अंग्रेजों के समय बनी जल निकासी की व्यवस्था अपने आप में उत्तम व्यवस्था थी, जिसका लाभ हमें आज भी मिल रहा है। शहर में दो बड़े नाले हैं, एक मौलाबाग और दूसरी मोड़ पर है। नहर पुल के पास बने सफन से निकल कर तिवारी मुहल्ला स्थित नाले से होकर हसपुरा रोड चाट में मिल जाती थी। परंतु मौजूदा समय में शहर में तेजी से बढ़ रहे आबादी और बन रहे मकानों ने इसे अतिक्रमण के जद में ले लिया है। इसे अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए समय-समय पर आवाज उठते रहता है लेकिन कुछ दिन चर्चा कर हम चुप हो जाते हैं। आज शहर में रोज नए मकान बन रहे हैं, नये मुहल्ले बस रहे हैं। परंतु देखा जाए तो कभी भी जल निकासी की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।  इसके लिए न तो मकान बनाने वाले सोच रहे हैं और न ही नगर पंचायत का ध्यान जा रहा है। वैसे शहर के कुछ पानी बम रोड तालाब में भी जमा होता हैं, परंतु अब ये अपना वजूद खोते जा रहा है। अंत में कहना चाहुंगा कि शहर हमारा है और समस्या भी हमारे द्वारा ही खड़ा किया गया है, तो इसके निदान के लिए हमें ही आगे आना होगा।

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