दर दर की ठोकरें खाती एक माँ – बेटे ने दिखाया बाहर का रास्ता

शाहीद क़य्यूम की रिपोर्ट:

लोग कहते हैं कि माँ के कदमों तले जन्नत होता है लेकिन कुछ लोग अपने ही जन्नत को जहन्नम बनाने पे तुले रहते हैं। ऐसा ही मामला आज सुबह-सुबह देखने को मिला और मैं खुद को रोक ना पाया। एक वृद्ध महिला जो ठण्ड से ठिठुर रही थी ओ किसी की माँ है। उनसे पूछने पे मालुम हुआ के उनके बड़े बेटे ने कुछ महीने पहले ही उन्हें घर से बाहर निकाल दिया है। एक छोटा बेटा था जो अपनी बूढ़ी माँ का ख्याल रखता था जिसका एक ट्रेन हादसे में मौत हो गया है। छोटे बेटे के मरने के बाद ही बड़े बेटे ने इस बूढ़ी माँ को घर से निकाल दिया है जो इस सर्दी में दर-दर की ठोकरें खा रही हैं।      

जब मैं इस वृद्ध महिला से खाने-पीने के बारे में पूछा के आप कहाँ से और कैसे खाती हो तब इन्होंने बताया के उनके पास सोने का कान का फूल और गले में दो सोने की ज्यितिया थी जिसे उन्होंने सात हजार रूपये में बेचकर अभी तक उसी से खा-पी रही थी। अब पैसा भी ख़त्म हो चला है। रात होती है तो कभी मंदिर की सीढ़ियों पर तो कभी किसी के दरवाजे पर सोकर जिंदगी गुजार रही हैं। लेकिन इस सर्दी के मौसम में बगैर छत के रात गुजरना कितना दर्दनाक होगा यह समझना किसी के लिए भी मुश्किल नहीं है। बावजूद इसके माँ की ममता तथा इंसानियत को भूल कर एक बेटे ने इस ठण्ड में दर दर ठोकरें खाने को अपने माँ को घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। शायद उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं कि ओ भी कभी वृद्धा अवस्था में जिंदगी बसर करेंगे और शायद उन्हें भी यह दिन देखने को मिल सकता है। तो कहावत है न जैसे को तैसा

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