जनता की आवाज़: एकल पदों का चुनाव हो आम जनता के द्वारा

ओम प्रकाश (पत्रकारिता) - पुरानी शहर, दाउदनगर

ओम प्रकाश (पत्रकारिता) – पुरानी शहर, दाउदनगर

लगभग छह महीने में बिहार में नगर निकाय चुनाव होने हैं। नगर क्षेत्र की जनता अपने शहर का सर्वांगीण विकास की परिकल्पना के साथ अपने वार्ड के वार्ड पार्षद को चुनती है, जिन पर चेयरमैन (नगर पंचायत व नगर परिषद में मुख्य पार्षद और नगर निगम में मेयर) चुनने की जवाबदेही होती है। कोई जरुरी नहीं कि वार्ड पार्षद जिन्हें चेयरमैन चुनें वह आम जनता की भी पसंद हो। मेरे समझ से जिस प्रकार ग्राम पंचायतों में एकल पदों पर चुनाव आम जनता करती है उसी प्रकार बिहार में भी नगर निकाय के एकल पदों के लिए चुनाव सीधे तौर पर आम जनता द्वारा होना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था के तहत इनका चुनाव वार्डों से चुने वार्ड पार्षदों द्वारा बहुमत से किया जाता है जिसमें जोड़ तोड़ एवं येन केन प्रकारेण (समझने वाले समझ सकते हैं) बहुमत जुटाने की होड़ सी मची रहती है। ऐसी परिस्थिति में पारदर्शितापूर्वक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। चेयरमैन को जहां जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए वहां किसी न किसी रुप में अनावश्यक दबाव में रहना पड़ता है चूंकि दो साल के बाद अविश्वास प्रस्ताव का भी डर बना रहता है। अविश्वास प्रस्ताव आने पर पुनः कुर्सी बचाने या अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने पर पुनः बनने के लिए वही प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। यदि एकल पद का चुनाव ग्राम पंचायतों की तरह नगर निकायों में भी आम जनता सीधे तौर पर करे तो एक चेयरमैन सीधे जनता के प्रति जवाबदेह बनकर निर्भिकता के साथ काम कर सकता है और अविश्वास प्रस्ताव का खतरा भी नहीं रहेगा।

 

वार्ड पार्षदों को और सशक्त भूमिका में आना होगा। उन्हें एक संतोषजनक मानदेय मिलना चाहिए। ऐसे उपाय किये जाएं कि जनता का काम वार्ड स्तर पर ही निष्पादित हो जाएं। अति आवश्यक कार्य के लिए ही नगर निकाय कार्यालय आने की जरुरत हो। नगर पंचायत के वार्ड पार्षदों को एवं वार्ड स्तर पर कार्यालय खोलकर उसे सशक्त बनाये जाने की जरुरत है। जब आम जनता का कोई कार्य वार्ड स्तर पर ही हो जाएगा तो फिर नगर निकाय में दौड़ लगाने की जरुरत नहीं होगी। विकास कार्यों में सभी वार्डों को समानतापूर्वक देखे जाने की जरुरत है। सबसे बड़ी बात यह भी है कि नगर निकायों में नयी नियुक्तियां विभिन्न पदों पर होनी चाहिए। मानव बल की कमी दीखती है। पुराने सेवानिवृत होते जा रहे हैं और नयी नियुक्ति हो नहीं रही है।

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