समाज में विकलांग हैं बराबरी के हक़दार, सिर्फ दया के पात्र नहीं

नित्यानंद की रिपोर्ट:

आज अंतराष्ट्रीय विकलांग दिवस है और आज इस मौके पर उन्हे दया का पात्र नहीं बल्कि बराबरी का सम्मान देने की बात की जाए। भारत की गिनती विकासशील देशों में होती है। विज्ञान के इस युग में हमने कई ऊंचाइयों को छुआ है। लेकिन आज भी हमारे देश, हमारे समाज में कई ऐसे लोग हैं जो हीन दृष्टी झेलने को मजबूर है। वो लोग जो किसी दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा का शिकार हो जाते है अथवा जो जन्म से ही विकलांग होते है, समाज भी उन्हें हीन दृष्टि से देखता है। जबकि ये लोग सहायता एवं सहानुभूति के योग्य होते है। विश्व विकलांग दिवस पर कई तरह के आयोजन किये जाते है, रैलियां निकाली जाती है, विभिन्न कार्यक्रम किये जाते हैं लेकिन कुछ समय बाद ये सब भुला दिया जाता है। लोग अपने-अपने कामों में लग जाते है और विकलांग-जन एक बार फिर हताश हो जाते है। विकलांगता शारीरिक अथवा मानसिक हो सकती है किन्तु सबसे बड़ी विकलांगता हमारे समाज की उस सोच में है जो विकलांग-लोगों से हीन भाव रखती है और जिसके कारण एक असक्षम व्यक्ति असहज महसूस करता है। अन्तरराष्ट्रीय विकलांग दिवस का उद्देश्य आधुनिक समाज में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के साथ हो रहे भेद-भाव को समाप्त किया जाना है।

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