अपना दुखड़ा किसे सुनाएँ, काश कोई सुन पाता-नगर भवन दाउदनगर

नगर भवन, दाउदनगर पर एक विशेष रिपोर्ट:

कला और संस्कृति जहाँ खून में बसता है, जहाँ के कलाकारों ने देश विदेश में अपना परचम लहराया, ऐतिहासिक धरोहरों से भरपूर ओ जगह जहाँ का गरीब बच्चा भी खुद को नवाब समझता है, जितिया जैसी संस्कृति जिसे देखने विदेशों से भी लोग आते हैं वहाँ का नगर भवन न जाने कितने वर्षों से तालियों की आवाज़ सुनने को तरस गया है। जहाँ तालियों की आवाज़ गूंजती वहां पड़ गया सन्नाटा-आखिर ऐसा क्या हुआ जो कि नगर भवन रहते हुए भी भवन खुद पे आँसू बहा रहा तो वहीँ कलाकार भवन को बाहर से उसे निहारते आ रहे हैं? क्या है दुखड़ा नगर भवन का और कलाकारों का जो दोनों एक दूसरे के पूरक रहने के बावजूद एक दूसरे से मिल नहीं पा रहे?

दाउदनगर नगर भवन इनडोर स्टेडियम का शिलान्यास *श्री रामविलास सिंह (पूर्व मंत्री)* के साहाय्य पुनर्वास एवम् गृह (कारा) विभाग के कर कमलों द्वारा माननीय * श्री राम शरण यादव* की अध्यक्षता में दिनांक 19-09-1993 को हुआ था। नगर भवन बना भी और इसमें कार्यक्रम की शुरुवात भी हुई, इसके इस्तेमाल के लिए कमिटी का भी गठन किया गया। चलिये जानते हैं कि इस मामले में जानकारों का क्या कहना है:

दाउदनगर का “नगर भवन” या भूतबंगला ?

दाउदनगर समृद्ध लोक कला, लोक संस्कृति एवं लोक कलाकारों का शहर है। यहाँ के कलाकार राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाते और दाउदनगर का नाम रौशन करते आ रहे हैं। 

लेकिन कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने या स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन का कोई उचित स्थान या मंच नहीं दिखता है।…पर मेरी नज़र क़रीब दो साल से दाउदनगर में स्थित, झाड़-झंकाङ से सुशोभित तथाकथित ” नगर भवन” पर है। 

यहाँ के जनप्रतिनिधियों या उनके करीबियों से मैंने नगर भवन के पूर्ण निर्माण पर कई बार बातचीत की, पर अबतक उनका जवाब… राजनितिक जवाब रहा है। दाउदनगर के कलाकारों के तरफ से यहाँ के कला के हित में यह प्रश्न है की इस एतेहासिक शहर के नगर भवन कब तक भूतबंगले के रूप में कंकाल ढांचा बन खड़ा रहेंगे ? 

अगर नगर भवन बनकर तैयार हो जाता है, उच्चकोटि के ध्वनिविस्तार यंत्र ( साउंड सिस्टम ) एवं मंच लाइट से सुसज्जित होता है तो यहाँ राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय लेवल के नाट्य, नृत्य एवं अन्य विधा के  कार्यक्रम का आयोजन कर दाउदनगर को मगध में कला एवं संस्कृति केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है। 

यहाँ के सभी मिडियाकर्मी, कलाकारों, सामाजिक संस्थान एवं आम जनता से अनुरोध है की कला के सम्मान एवं अस्तित्व को विस्तार करने हेतु क्रांतिकारी क़दम उठा कर दाउदनगर को गौरवान्वित करें।कलाकारों के लिए नगर भवन रियायत दर पर उपलब्ध हो।नगर भवन कमिटी में कम से कम 50% कलाकरों की भागीदारी हो। जिस दिन नगर भवन बनकर तैयार हो जाता है, ठीक उसके 3-4 महीने बाद राष्ट्रीय स्तर के नाट्य और नृत्य प्रतियोगिता और फ़िल्म फ़ेस्टिवल का आयोजन करूँगा।

धर्मवीर भारती- फिल्म डायरेक्टर


दाउदनगर की पहचान दाऊद ख़ाँ का किला एवं लोकसंस्कृति का पर्व जिउतिया से है। लोकसंस्कृति यहा के जन जन में बसी है। लेकिन लोकसंस्कृति को संबल प्रदान करने वाला नगर भवन की हालत जीर्ण शीर्ण है। नगर के प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों से आग्रह है क़ि नगर भवन के जिर्णोदार में सहयोग करें।

बिंध्याचल प्रसाद- सर्किल इंस्पेक्टर दाउदनगर थाना


शहर का एकमात्र टाउन हॉल अपने स्थिति पर रो रहा है। एक बार हमलोगों ने इसकी जीर्णोद्वार का प्रयास किया था उस टाइम हमलोगों की सरकार नही थी। कुछ लोग आगे आये थे लेकिन किसी कारण रुक गया लेकिन हम विस्वास दिलाते हैं कि सरकार की ओर से इसका कायाकल्प के कार्य को करवाने का काम करेंगे।

अरुण कुमार- प्रखंड अध्यक्ष राजद


नगर भवन दाउदनगर राजनीतिक एवं प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है।इसके जीर्णोद्धार की चर्चाएं तो कई बार उठीं जो सिर्फ चर्चा तक सिमट कर रह गयी।मेरे समझ से नगर भवन की पुरानी कमिटी को भंग कर नये सिरे से कमिटी का गठन किया जाए जिसमें यह भी ध्यान रखा जाए कि राजनीतिक दखल अंदाजी न हो और सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यों में रुचि रखनेवाले लोग शामिल हों।

ओमप्रकाश गुप्ता- पत्रकार, प्रभात खबर


दाउदनगर का नगर भवन नगरवासियो के जरुरत में काम आने और जनसभा के उद्देश्य से निर्मित कराया गया था। लेकिन ये सिर्फ नगर भवन नाम का है, मरम्मत के अभाव में ये वर्षो से बेकार पड़ा है। इसकी कमी तब ज्यादा खलती है जब हमारे शहर के किसी संस्था का कोई प्रोग्राम कराना हो, और वहाँ की कमियो को देखकर लोग वहाँ से कुछ कर नहीं पाते हैं।

शाहिद क़य्यूम-रिपोर्टर, दाउदनगर.इन

Leave a Reply