अंधियारे में रोशनी को तरसता शहर का यह पुल

दाउदनगर मेन रोड पर स्थित नहर का पुल अंधियारे में एक लंबे अरसे से रौशन होने को बेकरार है। पुल के आसपास तक़रीबन 150 मीटर तक मेन रोड अँधेरा रहता है। पेश है अंधियारे झेल रहे पुल की दुःख भरी दास्ताँ:

नगरवासियों, मैं हूँ नहर पर स्थित नया वाला पुल ठीक अपने बड़े भाई पुराने वाले पुल के बगल में। जब मुझे बनाया गया तो लोग हमारी तरफ आकर्षित होते चले गए, लोग मेरे बड़े भाई को भूलने लगे। मैं फुले नहीं समा रहा था, अपनी लोकप्रियता और आपकी सेवा कर खुद को गौरान्वित महसूस करने लगा। दिन पर दिन मेरी उपियोगिता बढ़ी और हम हज़ारों की संख्या में लोगों की सेवा करने लगे परंतु रात होते ही अंधियारे में गुजर रहे कुछ लोगों की निराशा भरी बातों से मुझे दुःख भी होता रहा।

दोस्तों मैं आपकी सेवा में जिस प्रकार दिन में लगा रहता हूँ, शाम के बाद भी उसी हौसले के साथ आपकी सेवा करना चाहता हूँ, हमें रौशन तो करो मेरा आपसे वादा है आपको निराश नहीं करूँगा। मुझे रौशनी नही मिलती साथ ही साथ मेरा मुहल्ला भी अँधेरा रहता है। शहर में तक़रीबन हर जगह को रौशन कर दिया गया है फिर मेरे साथ सौतेला व्यवहार क्यों? मेरे आसपास न कोई मकान है और नाही कोई दुकान इसलिए मुझे अंधियारे में अकेला छोड़ दिया आपने? 

मुझे तो इस बात का डर है कि मेरे आसपास अगर कुछ अनहोनी हो जाये तो लोग कहीं हमें कोसने न लगे। मैं कर भी क्या सकता, मेरी इज़्ज़त आपके हाथ में है। मैं तो आपमें से हर पुरुष, महिला और बच्चों को सेवा करना चाहता हूँ बिना रुके 24 घंटे। 

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