बैंक खुलने के पहले से बंद होने तक करना पड़ा घंटों इंतेज़ार

दाउदनगर से मंसूर आलम की रिपोर्ट:

आज दिनांक 10 नवम्बर 2016 को बड़े नोटों के अनियामित्ता के बाद बैंक खुलने का पहला दिन ग्राहकों से खचाखच भरा रहा। ये हाल नगर के सभी बैंकों का रहा। यह तस्वीर आज शाम के तक़रीबन 5:40 बजे की है। बैंक बंद होने के समय पर ग्राहकों की लाइन देखकर ऐसा लगता है कि इन दो दिनों में उन्होंने बहुत कुछ खो दिया है। बैंक का शटर 6 बजे बंद हुआ तो ज़रूर मगर साथ ही साथ घंटों इंतज़ार करने वाले सैंकड़ो ग्राहकों की उम्म्मीद को कम से कम आज के लिए बंद कर दिया।

ऐतिहासिक फैसला सराहनीय है मगर इनका क्या जो अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लाइन में लगे रहे लेकिन खाली हाथ वापस गए। बैंक खुलने से पहले ही सैंकड़ो की तादाद में ग्राहक लाइन लगाये हुए खड़े थे। कालेधन के चक्कर में आम लोगों की बदहाली ओ भी चंद रुपयों के लिए कहीं न कहीं आलोचना का सबब बन चूका है। अगर फैसला ऐतिहासिक तो बैंक के कार्यकाल को दुगना क्यूँ नहीं किया गया? यह हल सिर्फ अपने शहर का ही नहीं बल्कि देश के सभी हिस्सों का है। फैसला लेते समय कहीं न कहीं चूक रह गई है जो लोगों को समस्या में डाल दिया। शहरी क्षेत्र के लोगों को फिर भी कैशलेस ट्रांजेक्शन की सुविधा प्राप्त है जिससे अपने रोजमर्रा की ज़िन्दगी की 75% ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं मगर छोटे शहर के लोग और ग्रामीणों का क्या?

Leave a Reply