कैश से जूझने वालों की दर्द यह लाइन बयां करती है

दाउदनगर से हमारे पोर्टल के रिपोर्टर्स ने विभिन्न बैंक के बाहर की तस्वीर भेजी है जो ग्राहकों की दर्द को बयां करने के लिए पर्याप्त है। प्रधानमंत्री द्वारा लिए गए इस ऐतिहासिक फैसले की सभी ने सराहना की है, यह देश में छिपे कालेधन के लिये बहुत ही नायाब तरीक़ा है। बावजूद इसके आम जनता को अलग अलग जगहों पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कैश से जूझ रहे ग्राहकों के लिए यह एक चुनौती भरा समय है जहाँ बड़े नोट किसी काम के नहीं और छोटे नोट पास में उपलब्ध नहीं उस फैसले के बाद आज बैंक का पहला दिन है जहाँ बड़े नोट ग्राहक अपनर अकाउंट में डाल सकते हैं या उन्हें बदल कल छोटे नोट करा सकते हैं। 

एक कहावत थी कि गांव बसा नहीं की लुटेरे हाज़िर, ठीक उसी तरह का दृश्य आज सुबह शहर में बैंक खुलने से पहले देखा गया। इस तस्वीर में तीन अलग अलग बैंकों (मगध ग्रामीण बैंक, बैंक ऑफ़ बरोडा और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया) के बहार का दृश्य बैंक खुलने से पहले का है। किसी की सच में पैसे की तत्काल जरुरत हो सकती है और अगर इस प्रकार लाइन में लगकर पैसे का इंतज़ार करें तो समझ में आता है मगर किसी को अगर तत्काल जरुरत नहीं है तो उन्हें अफरा तफरी मचने की कोई आवश्यकता नहीं है। 

ग्राहकों का पैसा सुरक्षित है अगर मेहनत द्वारा कमाई गई सही जमापूंजी हो वरना आपका पैसा किसी कागज के सामान बन सकता है।

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