ये कंदील अब तेरा क्या काम…

दाउदनगर से संतोष अमन की रिपोर्ट:

दीपावली दीपों या रोशनी का उत्सव है, इस लिए इसे दिवाली या दीपावली का नाम दिया गया है। दीपावली में घर की सजावट दीपों से इस प्रकार की जाती है कि घर का हर कोना प्रकाशमान हो जाता है। दीपावली में एक और परंपरा चली आ रही है जो कि इस दिन घरो की छतों पर कंदील लगाने की परम्परा है। इसे लगाने के लिए श्रद्धा के साथ दीपावली से 10 दिन पूर्व ही लोग बनाने में जूट जाते थे । यमदिरी के दिन घर के छतो पर उसमें मिट्टी के दियें जलाकर लगाते थे। इस कृत्रिम प्रकाश की दुनिया में मानो गुम सा हो गया। एक दशक पूर्व तक बाजार और गांवों में दर्ज़नो से भी ऊपर घरों के छतो पर कंदील लगे नज़र आते थे और छठ पूजा के दूसरे दिन छतों से हटा लेते थे। कुछ लोग कार्तिक पूर्णिमा के बाद हटाते थे।

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