स्वच्छता के प्रति लोगों को अपनी मानसिकता बदलने की ज़रूरत

हमारे देश में आज भी ग्रामवासी अपने स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति उदासीन दिखते हैं। रहने के लिए गांव में भी 5 से 10 लाख का मकान तो बना लेते हैं, लेकिन अपने अपने घरों में 20 से 25 हज़ार रूपये का एक शौचालय बनवाना पसंद नहीं करतें हैं। शौचालय बनवाना जरुरी नहीं समझ कर फ़िज़ूल खर्च समझना कुछ लोगों की मानसिक्ता बन गई है। अपनी बहु बेटियो के सर से पल्लू गिरना पसंद नहीं परंतु खुलें में शौच के लिये भेजना मंज़ूर है। साथ ही साथ यह भी देखा गया है कि घर बनाना पसंद करते हैं पर घर से पानी निकासी के लिए नाली बनवाना पसंद नहीं करते हैं। इन सभी पहलुओं को अगर देखा जाये तो गावों में गन्दगी फैलने का एक मुख्य कारण यह भी है। गन्दगी में जीवन व्यतीत करना हमारी जिंदगी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं ।

उपरोक्त बातें अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन PATH के प्रखंड मॉनिटर अरविन्द कुमार सिन्हा ने गोह के कहार टोली स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 97 पर आयोजित सामुदायिक बैठक में कही। लोगों को मच्छर और गन्दगी से होने वाली बिमारियों से ग्राम और समाज को जागृत करने की कोशिश की। श्री सिन्हा ने बताया की स्वच्छता और सवास्थ्य के प्रति लापरवाही हमारे जीवन के लिए जानलेवा और घातक है । मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और मस्तिस्क ज्वर जैसी बीमारीयां हमारी ही लापरवाही की देन है । इसके लिए सम्पूर्ण समाज को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना पड़ेगा तभी सभी का कल्याण वर्ना हम सभी बिमारियों से प्रभावित होते रहेंगे ।

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