अभविप का चाइनीज़ सामानों के खिलाफ मोर्चा


दाउदनगर से संतोष अमन की रिपोर्ट:

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिसद नगर इकाई के द्वारा चाइनीज वस्तु का बहिष्कार हेतु एक रैल्ली दाउदनगर में निकाल गया जिसका नेतृत्व कार्यालय प्रमुख रौशन गुप्ता और प्रदुमन कुमार ने किया यह रैली कसेरा टोली से निकल कार मेन रोड हनुमान मंदिर होते हुये भखरुआ चौक तक गई वापस आकर लखन मोड़ पर चाइना का बना समान को जलाकर बिरोड किया गया नगर मंत्री चंदन कुमार और कॉलेज अध्यक्ष आर्य अमर केशरी ने कहा कि

 भारत में चीनी वस्तुओं की कोई जगह नहीं है।

उन्होंने कहा कि चीन उन देशों में से एक है जो सरेआम आतंक को बढ़ावा देते हुए उसका समर्थन कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन आतंकी हमलों से कई बेगुनाहों को अपनी जान गवानी पड़ती है और यह भारत देश की शांति के लिए भी खतरा बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इसलिए अब हमें आतंकवाद को समर्थन करने वाले देश चीन के उत्पादों को नहीं खरीदना चाहिए, ताकि चीन को भी भारतीयों की एकता का पता चल सके। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे इस बार त्यौहारों व रोजाना उपयोग होने वाले चीनी उत्पादों का बहिष्कार करे। उन्होंने आगे कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रदेश के सभी परिसरों में चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए एक व्यापक आंदोलन की शुरूआत है और युवाओं को राष्ट्रवादी उद्देश्य के लिए आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा और लोगों अपील  की की इस बार चाइनीज वस्तु को न लेकर भारतीय वस्तु का प्रयोग करें चाइनीज बल्ब की जगह घरेलु दिये जलाएं और खरीद ऐसे जगह से से करें की वह आपके खरीदी के वजह से दीवाली मना सके  इस रैली में एक से एक स्लोगन बनाकर लोगों को राष्ट्रवादी सोच पैदा करने की कोशिश की 

देश के धन को देश में रखना नहीं बहाना नाली में मिट्टीवाले दिए जलना अबकी बार दिवाली में।।

देश की सिमा रहे सुरक्षित चूक न हो रखवाली में 

मिटटी वाले दिए जलाना अबकी बार दिवाली में।

अपने देश का पैसा जाए अपने भाई की झोली में 

गया जो दुश्मन देश में पैसा लगेगा राइफल गोली में । 

जो चाइना का यार है देश का गद्दार है ।

अगर देश से है प्यार तो करो चाइना का बहिष्कार जैसे नारे लगाए ।

नगर सहमंत्री दीपक कुमार और सोनु पाण्डेय ने कहा कि कहा की चीन भारत का दुश्मन पाकिस्तान का समर्थन करता है, जबकि चीन की अर्थव्यवस्था भारत के पैसे से चलता है. अगर चीनी समान का आयात बंद कर दीया जाए तो चीन भूखे पेट मरेगा । इस मौके पर मिडिया सह प्रभारी सागर तांतिया कॉलेज उपाध्यक्ष संजीत कुमार,नगर सह मंत्री संतोष अमन, रवि कुमार, कुश कुमार, रितेश पाण्डेय, छोटेलाल कुमार, गोल्डेन कुमार शाह, बंधन कुमार, धीरज कुमार, सन्नी राज,चंदन कुमार, दीपक कुमार मिश्रा, रोहित कुमार, धीरज कुमार, आकाश कुमार, दीपक कुमार,  एवम अन्य सामिल थे ।

One comment on “अभविप का चाइनीज़ सामानों के खिलाफ मोर्चा
  1. PayingTones says:

    क्या-क्या बैन करोगे ? हर चीज से तो जुड़ा है चाइना…

    “क्या आपको चीनी प्रोडक्ट चाहिए? तो हमे माफ कीजिए, हम सिर्फ मेड इन इंडिया से डील करते हैं…” जिस सामान को लोग मेड इन इंडिया समझ रहे हैं क्या वाकई वो भारत में बना है या फिर किसी ना किसी तरह से चीन से जुड़ा है?

    जिस सामान को लोग मेड इन इंडिया समझ रहे हैं क्या वाकई वो भारत में बना है या फिर किसी ना किसी तरह से चीन से जुड़ा है?

    मेड इन इंडिया तो है, लेकिन इंडियन नहीं…

    चलिए सबसे पहले बात करते हैं उस चीज की जिसके जरिए ही लोग सोशल मीडिया पर इतने सक्रीय हैं. जिस स्मार्टफोन या लैपटॉप से लोग भारत में बनी चीजों के इस्तेमाल और चीनी सामान का बहिष्कार करने की बात कर रहे हैं वो कितना भारतीय है क्या आप जानते हैं? जनाब माइक्रोमैक्स, लावा, कार्बन, इंटेक्स, LYF, जियो, ओनिडा, रिंगिंग बेल्स, स्पाइस, वीडियोकॉन, YU टेलिवेंचर्स इन सभी देशी कंपनियों के स्मार्टफोन चीन में बनते हैं. जो मेड इन इंडिया का दावा करते हैं उनमें भी किसी ना किसी तौर पर चीन का सामान लगा हुआ है.
    चाहें स्मार्टफोन के पुर्जे हों या जियो सिम सभी कुछ चीन में बना है. माइक्रोमैक्स कंपनी ने रुद्रपुर, उत्तराखंड में 2014 में अपनी फैक्ट्री लगाई थी जिसमें एलईडी टीवी और टैबलेट बनते हैं, कहने को तो मेड इन इंडिया, लेकिन क्या कभी सोचा है कि इन टैबलेट्स के लिए रैम कहां से आती है?

    दवाइयों का दावेदार…

    भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी के बाद सबसे ज्यादा अगर किसी चीज का आयात चीन से होता है तो वो है ड्रग्स का. जी यहां दवाइयों और उर्वरकों (फर्टिलाइजर) के लिए आयात होने वाले ड्रग्स की बात हो रही है जो चीन से आते हैं. अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014-2015 में 2.22 बिलियन डॉलर (लगभर 1 हजार 467 करोड़ रुपए) का ड्रग्स आयात चीन से हुआ था. अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया मंत्र कहीं सबसे पहले लगना चाहिए तो वो दवाओं और उर्वरकों के मामले में भी होना चाहिए. पिछले चार सालों में चीन से लगभग 38,186 करोड़ रुपए का फार्मा आयात हो चुका है.

    जी जानते हैं इसका मतलब? जनाब इसका मतलब है कि अगर आपने कोई दवाई खाई है तो इस बात की संभावना काफी हद तक हो सकती है कि वो चीन से जुड़ी हुई हो. अब क्या आप दवा खाना भी बंद कर देंगे?

    चलिए इसे ऐसे देखते हैं. कौन-कौन से ड्रग्स चीन से आयात किए जाते हैं? इनमें पैरासिटामॉल (paracetamol), मेटमोर्फिन (metformin), रैनिटिडिन (ranitidine), एमोक्सिलिन (amoxicillin), सिप्रोफ्लोक्सासिन (ciprofloxacin), सिफिक्साइम (cefixime),एक्टिल सैलिसिक एसिड (acetyl salicylic acid), एब्सॉर्बिक एसिड ( ascorbic acid), ऑफ्लोक्सिन (ofloxacin), इबूप्रोफेन (ibuprofen), मेट्रोनिडेज़ोल (metronidazole) और एम्पिसिलिन (ampicillin). भारत में इस्तेमाल होने वाले इन ड्रग्स का करीब 80-90 प्रतिशत हिस्सा 2014-15 में चीन से आयात किया गया.

    मान लें कि इसमें से कई नाम तो आप पहली बार पढ़ रहे होंगे, लेकिन पैरासिटामॉल? 80 प्रतिशत बुखार की दवाओं में ये ड्रग्स होता है. ऐसे में क्या अब भारत में बुखार की गोली खाना भी बंद कर दिया जाएगा? क्या अब नहीं लगता की चीन पर निर्भरता कुछ ज्यादा ही है.

    क्या-क्या लेते हैं हम चीन से…

    अब एक नजर डाल लेते हैं उन चीजों पर जो चीन से सबसे ज्यादा आयात की जाती हैं. इनमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीने, इंजन, पम्प, कैमिकल, उर्वरक, लोहा, स्टील, प्लास्टिक, गहने और सिक्कों का धातू, नाव और जहाज, चिकित्सा के उपकरण, कपड़ा आदि शामिल हैं. साहब क्या-क्या इस्तेमाल करना बंद करेंगे आप?

    क्या होगा व्यापारियों का…

    अब अगर इससे भी पीछे के आंकड़ों को देखा जाए तो 2012-13 में चीन से लगभग 28 बिलियन डॉलर (लगभग 1 हजार 867 करोड़ रुपए) का आयात हुआ था. चीन से आयात करने पर व्यापारियों को काफी मुनाफा होता है. ये भारतीय व्यापारी चीन से सस्ते दाम में सामान और कच्चा माल मंगवाते हैं और उनसे यहां पर विनिर्माण करते हैं. कई तो ऐसे हैं जिनकी रोजी-रोटी ही चीन पर निर्भर है. ऐसे में अपने देश के व्यापारियों का क्या होगा?

    आखिर क्यों है ड्रैगन पर इतना निर्भर…

    चीनी आयात पर इतनी निर्भरता दाम की वजह से हुई है. भारत के मुकाबले कच्चा माल, मजदूरी और विनिर्मित सामान सब कुछ बेहद सस्ते दाम में मिलता है. अब स्मार्टफोन्स को ही देख लीजिए. चीनी स्मार्टफोन्स वो फीचर्स बहुत सस्ते में दे रहे हैं जो आम तौर पर महंगे फोन देते हैं. यही वजह है कि कई छोटे व्यापारियों ने अपना काम धंधा चीनी सामान पर आधारित कर लिया है. महंगे सामान से लेकर खिलौने और पटाखों जैसे छोटे सामान भी चीन से ही आयात हो रहे हैं.

    क्यों पूरी तरह से नहीं हो सकता चीनी सामान का बहिष्कार…

    चीनी सामान का पूरी तरह से बहिष्कार या यूं कहें कि टोटल बैन संभव नहीं है. दवाओं से लेकर रोजमर्रा की कई चीजें चीन से आयात होती हैं. अब आप ही बताएं कि क्या-क्या छोड़ा जा सकता है? ऐसे में अगर छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के पास का सामान आपने खरीदना बंद कर दिया तो उनकी दिवाली का क्या होगा कभी सोचा है आपने? सच तो ये है कि पूरी तरह से चीनी सामान का बहिष्कार हो ही नहीं सकता है. अगर अपने ही घरों में गौर से देखा जाए तो चीनी सामान बहुतायत में मिल जाएगा.

    PayingTones

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