कला और संस्कृति का संगम- मुहर्रम के जुलुस में उमड़ा जन सैलाब

आज मुहर्रम के मौके पर ताज़िये के पहलाम के दौरान जुलुस में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर “या हुसैन“, “या अली” के नारों को शहर की फ़िज़ाओं में बिखेर दिया। अपने शहर की कला और संस्कृति का यह अनूठा संगम जिसमे सदियों से खिलाड़ी/कलाकार अपने खेल और कला का कमाल दिखाते आ रहे हैं। मुहर्रम के मौक़े पर अलग अलग खलीफा के अंतर्गत आने वाले चौक के लोग इकट्ठा होकर शहर में कई स्थानों पर गोल की शक्ल में कलाकार अपना करतब दिखाते हैं। मुख्य रूप से हनुमान मंदिर के पास, फाटक के पास तथा क़ीला के पास घँटों खिलाड़ी गोल के अंदर अपना करतब दिखाते हैं।

शान्ति समिति की पहल और हिन्दू-मुस्लिम एकता का नतीजा देखने को मिला कि दशहरा के साथ साथ मुहर्रम भी शान्तिपूर्ण ढंग से पूरा हुआ। दोनों समुदायों के लोगों ने एक दूसरे के लिए त्याग देकर दाउदनगर की खुशरंग फ़िज़ा के माहौल को क़ायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशाषन की पहल और मैत्रीपूर्ण व्यव्हार के साथ साथ हर पल जनता की सेवा करते हुए भी इस तरह के बड़े कार्यक्रम को पूरा करने में दोनों समुदायों का पक्ष भी रखा और शान्ति बनाए रखने की पुरजोर कोशिश की। 

मुहर्रम के जुलुस में दिखा तिरंगे की शान, यही है असली हिंदुस्तान
पोर्टल की तरफ से दाउदनगर प्रशाषन का हम शुक्रीया अता करते हैं तथा हम दुआ करते हैं कि आने वाले समय में भी आपसी भाईचारगी हमेशा यूँही बनी रहे।

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