टेक्नोलॉजी की मदद से जिव्तिया को मिली नयी पहचान

(बम रोड परिवार के मंच पर रूपेश सोनी, मैं, फ्रांस के पियर, हाजीपुर के अनमोल कुमार तथा पांडेय जी)

इस वर्ष जिव्तिया पर्व को टेक्नोलॉजी की खूब मदद मिली जिसके कारण इस पर्व के म्यार और लोकप्रियता में काफी इज़ाफ़ा हुआ है। दाउदनगर के कई सारे लोगों ने अपनी बहुमूल्य संस्कृति को दुनिया के सामने रखने के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल करने का प्रयास किया है। 


-क्रम में सबसे पहला नाम धर्मवीर भारती का आता है जिन्होंने मल्टीमीडिया टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर जिव्तिया पर्व को डिजिटल रूप दिया जिससे विश्व में कहीं भी कभी भी अपनी संस्कृति का बखान करना सरल हो गया।

-क्रम में दूसरा नाम हमारी पोर्टल www.daudnagar.in का आता है। इस पोर्टल ने जिव्तिया से जुडी हर जानकारी, हर प्रकार का न्यूज़, हर प्रकार का इवेंट का डिजिटल प्रमोशन किया, जिससे क्षण भर में हज़ारों युवाओं को जानकारी मिलती रही। इसी प्रमोशन का नतीजा कि दाउदनगर के इतिहास में पहली बार कोई फ़्रांसिसी अपने संस्कृति को आँखों क्र सामने देख इसे महसूस कर सका।

– क्रम में तीसरा स्थान प्रयत्न एजुकेशनल एंड सोशल ट्रस्ट का आता है जिहोने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर ऑनलाइन नक़ल प्रतियोगिता का आयोजन किया साथ में लाइव प्रतियोगिता का प्रसारण यूट्यूब तथा फेसबुक के जरिये किया।

इसके अलावा हम उन सारे नवजवानों की तारीफ करते हैं जिन्होंने सोशल मीडिया तथा व्हाट्सएप्प के ज़रिये मीडिया के लोगों तक हर मुमकिन जानकारियां पहुंचाते रहे। जिव्तिया के मौके पर कई सारे व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाकर हर प्रकार की पोस्ट को अपडेट करते रहे हैं।

मुझे ख़ुशी है कि हमारे शहर के लोगों ने टेक्नोलॉजी को गोद लिया जिसके कारण जिव्तिया की पहचान देश से बाहर निकल कर विदेश तक पहुंची।

टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बगैर भी लोगों ने अब तक कोशिश की है इसकी लोकप्रियता बढ़ाने की मगर फर्क आप स्यवं महसूस कर सकते हैं

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दाउदनगर की “कला और संस्कृति” के फ़ेहरिस्त में एक अहम नाम जिव्तिया पर्व का है जिसे दाउदनगर-वासी तक़रीबन 150 वर्ष पहले से अब तक मनाते आ रहे हैं। परंतु पिछले कई वर्षों में जिस प्रकार जिव्तिया पर्व की लोकप्रियता बढ़ी है है ओ क़ाबिले-तारीफ है। पहले जिव्तिया पर्व हिन्दू समाज के कुछ जातियों तक ही सीमित था मगर जब से नवजवानों ने इस पर्व को दाउदनगर की कला और संस्कृति से जोड़ कर इसकी रक्षा करने तथा इसे एक नए मुक़ाम तक पहुंचाने की ठानी है तब से जिव्तिया को हांथों-हाँथ लिया जा रहा है। लोगों ने इसे प्रतियोगिता का रूप देकर इसे और भी विकसित करने का अवसर दिया है।

4 comments on “टेक्नोलॉजी की मदद से जिव्तिया को मिली नयी पहचान
  1. Shahid says:

    jitiya ko lekar aapka kaam kafi sarahniye raha.

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