Daudnagar: तो चला, चलल जाए जिव्तिया देखे


कुछ महीनों से जिव्तिया के बारे में हमसब चर्चा कर रहे हैं, लगातार हम जिव्तिया से जुडी हुई हर अपडेट पर नज़र बनाये रखे हैं, हर क्रिया-कलाप के बारे में अबतक यथा संभव जानकारी पहुँचाते रहे हैं, परंतु अब समय आ गया है जिव्तिया देखने का, महसूस करने का, इसमें भाग लेने के लिए, पुरस्कार से समान्नित होने का, धूम मचाने का और न जाने क्या क्या। 

तो ईहे चलते हम सब से कहित ही के चला चलल जाये जिव्तिया देखे

जिव्तिया देखने के लिए दाउदनगर के तमाम मंच वालों ने आप सभी को सादर आमंत्रित किया है। जिव्तिया का रंगा-रंग कार्यक्रम 22, 23 तथा 24 सितंबर को होगा।

दाउदनगर में मुख्यतः तीन जगहों पे जिव्तिया अभिनय प्रतियोगिता का मज़ा लिया करते थे मगर इस बार कहानी में ट्विस्ट है आप को निर्णय लेना बहुत ही मुश्किल होगा क्योंकि-

1. सर्वे के मुताबिक जिव्तिया का सबसे पसंदीदा मंच पटवाटोली का है। आप लोगों ने जो अपनी राय भेजी है उसके मुताबिक। तो जिव्तिया भी क्या देखना अगर पटवाटोली के मंच का आनंद नहीं उठाये।

2. अब अगर पटवाटोली जा रहे हों तो रास्ते में ही बम रोड का मंच भी दिखेगा। आप भला उसे कैसे छोड़ सकते हैं।

3. अब बात करते हैं इस वर्ष के मुख्य आकर्षण केंद्र का “ज्ञान दीप समिति“। बिना किसी शक के मैं ये दावे से कह सकता हूँ कि ज्ञान दीप समिति कम से कम 22 सितंबर को सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना रहेगा। 

क्योंकि 

-यहाँ पे बिहार सरकार के कला-संस्कृति मंत्री जिव्तिया पे आधारित फिल्म का उद्घाटन करने के लिए मौजूद रहेंगे।

धर्मवीर भारती निर्देशित फिल्म जिव्तिया के रिलीज के कारण साज सज्जा का अच्छा खासा ध्यान रखा जायेगा।

– इस बार ज्ञान दीप समिति के सचिव हैं चिंटू मिश्रा और एकता संघ का पूरा समर्थन ज्ञान दीप समिति को हासिल है इसलिए सारे सदस्य भी ज्ञान दीप समिति के मंच के पास दिखेंगे।

– इस बार मौजूद होंगे फ्रांस से आये हुए अंतर्राष्ट्रीय दर्शक। जी हां इस बार हमने अपने सहकर्मी Pierre Avoris (जो कि फ्रांस के रहने वाले हैं) को दाउदनगर में जिव्तिया के मौके पर आमंत्रित किया है और ओ हमारे साथ आ रहे हैं।

4. दाउदनगर नगर पंचायत ने भी इस बार एक गूगली डाली है और दाउदनगर में प्रत्येक वर्ष “दाउदनगर जिव्तिया लोकोत्सव” आयोजन करने की बात कही है। नगर पंचायत छावनी में इस बार जिव्तिया अभिनय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। यह पहली बार हो रहा है मगर फिर भी आपका मन यहाँ जाने को भी करेगा।

पेश है ज्ञान दीप समिति के द्वारा भेजी गई जिव्तिया के ऊपर विस्तृत जानकारी:

दाउदनगर शहर (जिला औरंगाबाद) जिउतिया मनाने का विषिश्ट ढंग है जो काफी मशहुर है। यहां इसे नकल-पर्व के रूप में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इसे देखने के लिए झारखंड से और उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर तक से लोग सपरिवार आते है। यही कारण है कि यह अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान रखता है।जिउतिया संस्कृति का जन्मदाता है।यानी कम से कम संवत 1917 पूर्व यहाँ आई है।हम सभी जानते है कि जिउतिया-पर्व (जीवित-पुत्रिका व्रत) आश्विन मास (सितम्बर-अक्टुबर) में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इसका विशेष वर्णन ‘भविष्य पुराण’ में मिलता है। इस पर्व में माता अपने पुत्र के चिरंजिवी होनी की कामना करती है। इसलिए जब कोई पुत्र किसी बड़े संकट से बच जाता है तो लोग कहते है – ‘खैर मनाओ कि तुम्हारी मां जिउतिया की थी, सो तुम बच गए।’ यह पर्व तीन दिनों का होता है – एक दिन नहाय-खाय यानी सप्तमी को माताएं स्नान करके खाना खाती है, अष्टमी को उपवास रखकर शाम में पूजा करती हैं और नवमी को सुबह में उपवास तोड़कर ‘पारण’ कर लेती हैं। यहां की खासयित यह है कि यहां इस पर्व का आरम्भ ‘अनन्त पूजा’ के दूसरे दिन से ही हो जाता है। जिउतिया में जीमूतवाहन भगवान की पूजा की जाती है। इस समारोह का शुभारंभ इस उमंग झुमर गीत से होती है:- “धन भाग रे जिउतिया,तोरा अइले जियरा नेहाल जिउतिया ।
जे अइले मन हुलसउले नौ दिन कइले बेहाल जिउतिया”

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